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व्यापार के दलदल में फसी शिक्षा व्यवस्था, आखिर कितने और मासूमो की बलि लेगी ?

written By- Nitin Sharma

एक निजी समाचार चैनल पर प्रद्धुमन की माँ हाथ जोड़ कर सरकार से बस यही गुहार लगा रही थी कि असली गुनहगार को सजा मिलनी चाहिए। सोचिये ज़रा, उस माँ और उस बाप के दर्द के बारे में, जो अपने बच्चे को स्कूल इस उम्मीद में छोड़कर आते है कि उनका बच्चा दिनभर की तालीम लेकर शाम को वापस घर आ जाएगा,लेकिन करीब 15 मिनट बाद पिता को फोन आता है कि आपका बच्चा बाथरूम में गिर गया है, उसे अस्पताल ले जा रहे हैं, बदहवास हालत में मां, बाप अस्पताल पहुंचते है लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही उनके आंखों का तारा, उनका सहारा दम तोड़ देता है। सोचिए जरा उस मां-बाप के बारे में जो अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा देने के लिए अपनी हैसियत से ज्यादा पैसे खर्च कर रयान जैसे बड़े स्कूल में दाखिला दिलाते है। दाखिला तक ही मां-बाप की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती,उसके बाद रयान जैसे प्राइवेट स्कूलों की चोचलेबाज़ी को भी पूरा करना उन मां-बाप के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती, प्राइवेट स्कूल कभी स्कूल की मुहर लगाई ड्रेस, कभी कॉपी-किताब तो कभी एनयुअल फंक्शन ऐसे न जाने कितने ढकोसलों के जरिए मां-बाप से मोटी रकम एंठते है, बेचारे मां-बाप भी करें तो क्या करें, अपने बच्चों के भविष्य में अपने सपनों को देखते हुए अपनी पाई-पाई बच्चे की एजुकेशन पर लुटा देते है और बदले में उन्हें क्या मिलता है…उनके बच्चे के साथ कुकर्म और हत्या?

प्रद्धुमन के साथ पहले कुकर्म होता है और फिर गला काटकर उसकी हत्या कर दी जाती है और ये सब होता है रयान इंटरनेशनल स्कूल में जो बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के नाम पर सालभर में लाखों की फीस वसूलता है,बेशर्मी की हद तो तब हो जाती है जब इतनी बड़ी वारदात के बाद भी स्कूल अपनी लापरवाही नहीं स्वीकारता। क्या स्कूल की कार्यवाहक प्रिंसिपल अपना माँ वाला दिल स्कूल आने से पहले घर पर छोड़ कर आती होंगी, वरना इतनी आसानी से कैसे पल्ला झाड़ा जा सकता है एक मासूम की मौत पर? इस केस में मां-बाप सीबीआई जांच की मांग कर रहे है और स्कूल को बंद कराने की भी उनकी मांग है,प्रद्धुमन की हत्या के आरोप में कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है,उसने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया है, लेकिन मां-बाप का विश्वास के कि बेटे की मौत के पीछे सिर्फ कंडक्टर ही नहीं बल्कि कई और लोग भी शामिल है इसी वजह से प्रद्धुमन की मांग रो-रोकर देश के प्रधानमंत्री से सीबीआई जांच की मांग कर रही है, हालांकि उनकी मांग को तवज्जो मिलती है या नहीं समय के साथ साफ होगा

लेकिन सवाल सरकार,सिस्टम सभी से है कि आखिर ऐसा क्यों है कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए हमे एक आंदोलन की ज़रूरत पड़ती है और अनहोनी होने से पहले हमारी आँखों पर बंधी पट्टी नहीं खुलती? पिछले साल दिल्ली के रयान में ही एक बच्चे का शव वाटर टैंकर में मिला था, बावजूद रयान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उसका नतीजा सबके सामने है। सवाल ये भी है कि प्राइवेट स्कूलों की झूठी चमक आखिर कितने और मासूमो की बलि लेगी? समाज अब शिक्षा में बदलाव मांग रहा है, और बदलाव किसी एक से नहीं आता, उसके लिए पहले झूठी चमक से बाहर निकलना होगा और शिक्षा को व्यापार के दलदल से निकालना होगा। चार दिन सोशल मीडिया पर स्टेटस डालने और मोमबत्ती जलाने से अब कुछ नहीं होने वाला, मोटी फीस और शिक्षा के स्तर को तराज़ू में न रख के तोलने का वक्त आ गया है , वक्त की मांग रयान जैसे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर अब रोक लगाने की भी है और सरकार,सिस्टम,नागरिक हर किसी को मिलकर इसके लिए काम करने की जरूरत है ताकि अब और किसी प्रद्धुमन की जान न जाए।