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ये हैं 14 सबसे ख़तरनाक डकैत, जिनकी वजह से चम्बल घाटी आज भी है वीरान

फिल्मों, किस्से कहानियों में हम अक्सर डकैतों कहानियां सुनते हैं। फ़िल्मी परदे पर डकैतों को देख कर ही हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। तो इनकी हक़ीकत की कहानियां सुनना कितना दिलचस्प होगा इसका अंदाजा शायद आप खुद ही लगा सकते हैं। डाकूओं का जिक्र होते ही सबसे पहले हमारे जेहन में मध्यप्रदेश की चंबल घाटी का नाम सबसे पहले आता है। कुख्यात और क्रूर डाकुओ की शरणस्थली रही चम्बल घाटी खुद में अनगिनत कहानियां समेटे हुए है। इस घाटी के पास ही चम्बल नदी भी बहती है जिसमे खूंखार मगरमच्छ का बसेरा है। इस घाटी में कई गहरी गुफाओ का जाल भी बिछा हुआ है, ये सब मिलकर इस चम्बल घाटी को खतरनाक और रहस्यमयी बना देती है शायद यही वजह है कि लोग यहाँ जाने से दिन में भी कतराते है। आप ट्रैन में हों या बस में या अपनों के साथ अपने वाहन में, एक अजीब सा डरावना सन्नाटा आपकों ख़ुद बता देता है कि चम्बल घाटी आ गई । दरअसल चंबल में कई हैक्टर की जमीन बीहड़ है । जो डकैतों की सबसे बड़ी पनाहगार मानी जाती थी। चम्बल घाटी में कई ऐसे डकैत हुए हैं, जिन्होंने सालों तक पुलिस के नाम में दम करके रखा। हम आपको ऐसे ही कुछ डकैतों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने चंबल घाटी को आतंक और खौफ़ का ऐसा घर बना दिया जहां आज तक कोई बसना नहीं चाहता।

मान सिंह

डकैत मान सिंह भारत की आजादी के पहले और आजादी के बाद तक सक्रिय रहा था। साल 1935 से 1955 के बीच मान सिंह ने एक हजार से अधिक डकैतियों की वारदातों को अंजाम दिया था। मान सिंह ने 182 के आसपास हत्याएं की। मान सिंह को स्थानीय लोग दयावान मानते थे, जो गरीबों की सेवा में तत्पर रहता था। उसकी छवि रॉबिनहुड सरीखी थी, जो अमीरों को लूट कर धन गरीबों में बांट दिया करता था। 1955 में सेना के जवानों ने मानसिंह की गोली मारकर हत्या कर दी।

जगजीवन परिहार

डकैत जगजीवन परिहार को मार गिराने के लिए अब तक सबसे लंबा एनकाउंटर चला था। उन्नीस घंटे चले एनकाउंटर में पुलिस ने डैकत परिहार को मार गिराया था। परिहार पर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ा इनाम घोषित किया था।

फूलन देवी

भारतीय डकैतों की लिस्ट फूलन देवी के बगैर पूरी नहीं हो सकती। फूलन का जन्म एक गरीब मल्लाह के परिवार में हुआ था। बचपन में ही उसकी शादी उससे12 वर्ष बड़े एक व्यक्ति के साथ ब्याह दी गई थी। फूलन दो बार अपने ससुराल से भाग आई। फूलन डकैतों के एक गिरोह से जुड़ गई और अपने ससुराल जाकर पति को चाकू मार घायल कर दिया। फूलन के गिरोह का सामना जब-तब ठाकुरों के गिरोह से होता रहता था। एक मुठभेड़ के दौरान फूलन को बंदी बना लिया गया और तीन सप्ताह तक कई लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया। फूलन देवी ने इसका बदला लिया। उसने एक रात 22 ठाकुरों की गोली मार कर हत्या कर दी। वर्ष 1983 में फूलन ने समर्पण कर दिया। लेकिन 2001 की 25 जुलाई को दिल्ली में तीन लोगों ने उसकी हत्या कर दी।

मलखान सिंह

डकैत से राजनीति में आए मलखान सिंह पर एक समय में 2.5 लाख रुपए का इनाम घोषित था। 1982 में डकैत मलखान सिंह ने तत्कालीन सीएम अर्जुन सिंह के सामने समर्पण किया था। लेकिन इसके बाद मलखान सिंह ने पंचायत चुनाव लड़ा और इसमें जीत हासिल की।
पान सिंह तोमर

डकैत पान सिंह तोमर डकैत बनने से पहले पान सिंह तोमर रुड़की स्थित बंगाल इजीनियर्स में सुबेदार के पद पर तैनात था। बाद में उसका चयन भारतीय सेना के लिए हो गया, जहां उसका झुकाव खेलों के प्रति हुआ। पान सिंह तोमर सात सालों तक लंबी बाधा दौड़ में राष्ट्रीय चैम्पियन रहा। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उसके गांव में जमीन विवाद हुआ और उसने एक व्यक्ति की हत्या कर दी और खुद को बागी घोषित कर दिया। इसके बाद वो पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

पुतली बाई

पुतली बाई इस देश की प्रथम महिला डकैत थी। माना जाता है कि पुतली बाई एक नर्तकी थी, जिसका अपहरण सुल्ताना डाकू ने कर लिया था। करीब तीन सालों तक उसने चम्बल घाटी के क्षेत्र में हत्या, अपहरण और फिरौती की घटनाओं को अंजाम देकर अपना दबदबा कायम रखा। इस क्षेत्र के दतिया गांव में पुतली बाई ने एक ही रात 11 लोगों की हत्या कर दी थी और 5 लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। यही नहीं, पुतली बाई के गिरोह के सदस्य 7 लोगों का अपहरण भी कर ले गए। दरअसल, पुतली बाई को शक था कि दतिया के लोगों ने पुलिस को उसके बारे में जानकारी दी थी।

शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ

शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ,चम्बल के क्षेत्र में आतंक का दूसरा नाम था। बताया जाता है कि ददुआ ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए एक व्यक्ति की हत्या थी। 22 जुलाई 2007 को ददुआ अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

रामबाबू और दयाराम गडडिया

रामबाबू और दयाराम गडडिया भाई थे, जो बाद में कुख्यात डकैत बन गए। मध्यप्रदेश की पुलिस ने उनके गिरोह को T1 – Target One – का नाम दिया था। यह गिरोह इस सफाई के साथ काम करता था कि पुलिस को यह तक नहीं पता था कि इसके आखिर कितने सदस्य हैं। साल 1999 में एक आपराधिक वारदातत के दौरान गोली लगने के वजह से रघुबीर मारा गया। उसके साथ मारे जाने वालों में 3 अन्य सदस्य भी थे। वर्ष 2000 में इस गिरोह के कई सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गए, लेकिन ये लोग 2001 में एक जेल से दूसरे जेल ले जाते समय पुलिस को झांसा देकर भाग निकले। वर्ष 2006 के अगस्त महीने में एक मुठभेड़ के दौरान दयाराम की मौत हो गई। वहीं वर्ष 2007 में रामबाबू एक मुठभेड़ के दौरान मारा गया।

सुल्ताना डाकू

1920 के दशक में उत्तर प्रदेश के प्रान्त में सुल्ताना डाकू का खौफ था। सुल्ताना का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। सुल्ताना के पास एक चेतक नामक घोड़ा था। सुल्ताना डाकू के बारे में कई चर्चिच किस्से हैं। माना जाता है कि सुल्ताना डाकू अंग्रेजों के खिलाफ था, जबकि उसे स्थानीय लोग प्यार करते थे। उसके बारे में एक चर्चित कथा है कि वो ब्रिटिश राज के ट्रेनों को लूटकर गरीबों में बांट दिया करता था। बाद में उसे पकड़ लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई।

माधौ सिंह और मोहर सिंह

डकैतों में सबसे ज्यदा भयानक और कठोर दिल के थे माधौ सिंह और मोहर सिंह. इन पर 2.5 लाख के इनाम के साथ इनके बड़े गिरोह पर कुल 5 लाख का इनाम था। बताया जाता है कि ये अपने शिकार के नाक-कान काट देते थे।

अनीसा बेगम

अनीसा बेगम के के बारे में कहा जाता है कि वो कोई भी हथियार आसानी से चला सकती थी। अनीसा का जन्म जालौन जिले के रामपुरा गांव में हुआ था। उसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है कि वो कैसे डकैत बन गई। अनीसा बेगम ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के इलाकों में कई डकैतियों को अंजाम दिया। उसका नाम लोगों में खौफ पैदा करने के लिए काफी था।
निर्भय सिंह गुज्जर

चम्बल घाटी में निर्भय सिंह गुज्जर ने अपनी ही एक सरकार बना रखी थी। उसके सिर पर सरकार ने 2.5 लाख रुपए का इनाम रखा था। साल 2005 के 8 नवंबर को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गुज्जर की मौत हो गई. निर्भय गुज्जर ने चार शादियां की थीं। उसके गिरोह में कई खूबसूरत लड़कियां सदस्य थीं। इन दस्यु संदरियों में सीमा परिहार मुन्नी पांडे, पार्वती उर्फ चमको, सरला जाटव और नीलम प्रमुख थीं। निर्भय ने इन लड़कियों का अपहरण किया था। निर्भय गुज्जर की मौत के बाद सरला जाटव ने इस गिरोह की कमान अपने हाथ में ले ली।

सीमा परिहार

सीमा परिहार का जन्म उत्तर प्रदेश के एक गरीब ठाकुर परिवार में हुआ था। 1983 में सिर्फ 13 साल की आयु में डकैत लाला राम और कुसुमा नाईन ने उसका अपहरण कर लिया था। सीमा परिहार ने डकैतों के गिरोह में आने के बाद उनके साथ ही रहना उचित समझा और 1986 में निर्भय सिंह गुज्जर के साथ शादी रचा ली। सीमा परिहार ने 70 लोगों की हत्याएं की और 200 लोगों का अपहरण किया। यही नहीं, उसने 30 से अधिक घरों में डकैती की वारदातों को अंजाम दिया था। वर्ष 2000 में उसने उत्तर प्रदेश पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

सरला जाटव

निर्भय सिंह गुज्जर की मौत के बाद सरला जाटव ने ही उसके गिरोह की कमान संभाली थी। माना जाता है कि उसने गिरोह को दो टुकड़ों में बांट दिया था। सिर्फ 11 साल की उम्र में ही सरला का अपहरण कर लिया गया था। जीन्स और रे-बैन गॉगल्स की शौकीन सरला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।