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धोनी फिर बने टीम इंडिया के तारणहार,जानिए कैसे सेमीफाइनल जीतने में निभाई अहम भूमिका

टीम इंडिया उस दौर में है जहां उसकी जीत में माही का नाम ना जुड़ा हो ऐसा नहीं हो सकता। भारत और बांग्लादेश के बीच चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। अब आप सोच रहे होंगे कि महेंद्र सिंह धोनी को तो सेमीफाइनल में बल्लेबाजी करने तक का मौका नहीं मिला फिर जीत में उनका क्या योगदान? जनाब, दरअसल टीम इंडिया अगर चैंपियंस ट्रॉ़फी के फाइनल तक पहुंची है तो उसमें माही की अहम भूमिका रही है। अब सेमीफाइनल मुकाबले को ही ले लीजिए। बांग्लादेश को शुरुआती 2 झटके लगने के बाद बांग्लादेश के बल्लेबाज तमीम इकबाल और मुश्फिकुर रहीम ने एक बार फिर से पारी को समेटना शुरू किया और इन दोनों ने 100 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप भी कर ली थी और भारत के सारे गेंदबाज इनका विकेट लेने में नाकाम साबित हो रहे थे। ऐसे में विराट जा पहुंचे अपने सबसे अनुभवी साथी और पूर्व कप्तान महेंद्र ‘बाहबली’ धोनी के पास। फिर धोनी ने चली ऐसी चाल जिसमें बांग्लादेश के ये दोनों बल्लेबाज फंस गए और अपना विकेट गंवा बैठे। दरअसल वो चाल थी केदार जाधव से गेंदबाजी कराना। इस सीरीज में अभी तक विराट ने केदार से गेंदबाजी नहीं करवाई थी लेकिन जैसे ही माही के कहने पर विराट ने जाधव को गेेंद सौंपी,तो जाधव ने इस फैसले को अपने पहले ओवर में ही सही साबित किया और 70 रनों पर बल्लेबाजी कर रहे तमीम इकबाल को बोल्ड कर दिया। तमीम का विकेट जैसे गिरा माही भी झूम उठे,हालांकि धोनी को अक्सर अपने इमोशन छुपाते ही देखा गया है लेकिन इस मौके पर ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद केदार जाधव ने मुश्फिकुर रहीम को भी 61 के स्कोर पर विराट के हाथों कैच आउट करवा दिया और टीम को डबल खुशी दे दी।

चैंपियंस ट्रॉफी में माही ले चुके हैं कुछ और अहम फैसले
चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के पहले मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ जब धोनी की जगह हार्दिक पांड्या आए तो लोग चौंक गए क्योंकि वो धोनी से पहले आए थे। इस मामले में सूत्र बताते हैं कि ये फैसला खुद धोनी का था जो बाद में सही भी साबित हुआ। इसके बाद करो या मरो मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ जब आपको स्लिप में खड़े विराट खड़े दिखाई दिए तो इसके पीछे भी धोनी का ही दिमाग था। तो इतना साफ है कि महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के चाचा चौधरी हैं।