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जानिए : फांसी की सजा देने के बाद जज क्यों तोड़ देते हैं पेन की निब !

आपने कई बार फिल्मों में देखा होगा कि जज मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ देते हैं। आज हम आपको बताएंगे आखिर मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब को क्यों तोड़ दिया जाता है। ऐसा ब्रिटिश काल से चला आ रहा है जिसको भारत आज भी फॉलो कर रहा हैं। हम सभी सोचते है कि आखिर इसके पीछे की वजह क्‍या हैं। हम आपको बताते है आखिर जज ऐसा क्यों करते हैं।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ने के पीछे कोई कानूनी प्रावाधान नहीं है। लेकिन फिर भी दशकों से पैन की निब तोड़ने की प्रथा चली आ रही है।भारतीय कानून में फांसी की सजा सबसे बड़ी सजा होती है, क्योंकि ये वो सजा है जिससे व्यक्ति की पूरी जीवन लीला समाप्त हो जाती है।

इसलिए जब जज सजा को मुक़र्रर करते हैं, तो उसके बाद पेन की निब को तोड़ देते हैं। इसके साथ ये उम्मीद भी की जाती है कि आज के बाद दोबारा ऐसा अपराध ना हो, जिससे किसी को फांसी की सजा देनी पड़ी। इसका दूसरा कारण ये भी माना जाता है कि जब पेन से ‘मौत’ लिखा जा चुका होता है, तो इसी क्रम में पेन की निब को भी तोड़ दिया जाता है। जिससे कि उस इंसान की मौत के साथ, मौत लिखने वाले उस ‘पेन’ की भी मौत हो जाए।

जज निर्णय के समय इस्‍तेमाल किए गए पेन की निब इसलिए भी तोड़ते है क्‍योंकि ऐसा कर के वो अपने आप को इस अपराध से मुक्‍त करते है कि उन्‍होंने किसी की जिंदगी को खत्‍म कर दिया। ये एक रिवाज है जो वो फॉलो करते हैं। एक पुरानी कहावत कही गई है कि मौत की सजा बहुत ही दुखद सजा होती है, पर कभी-कभी इसे देना जरूरी हो जाता है और कलम की नोक तोड़कर इस दुख को व्‍यक्‍त किया जाता है।