Bollywood Latest Movie Review Movie Reviews

Film Review : महिलाओं के मासिक धर्म पर ख़ास मेसेज देती है “फुल्लू”

शारिब हाशमी और ज्योति शेट्टी स्टारर फिल्म ‘फुल्लू’ आज रिलीज़ हो गई है। इस फिल्म ट्रेलर काफी अच्छा है जिससे आप इस फिल्म देखने का मन बना सकते हैं। इस फिल्म को अभी मिले जुले रिव्यु मिल रहें हैं। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ‘A’ सर्टिफिकेट दिया है। इस फ़िल्म के ज़रिए फ़िल्म महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान अवेयरनेस बढ़ाने की कोशिश की गई है।

कहानी

ये कहानी गांव के रहने वाले फुल्लू यानी शारिब अली हाशमी की है जो अपनी मां और बहन के साथ गांव में रहता है। इस फ़िल्म में फुल्लू का किरदार एक ऐसे निक्कमे आदमी का दिखाया गया है जो कोई काम नहीं करता। वो बस गांव की रहने वाली हर एक महिला के लिए जब भी शहर जाता है तो उनकी जरूरत का सामान जरूर लेकर आ जाता है। बस यही उसका काम है।

हमारे देश में आज भी ये पुरानी घिसी पिटी सोच ज़िंदा है कि लड़के की शादी कर दो तो शायद वो काम करने लगे। यही सोच फुल्लू की माँ की भी है जिसे देखते हुए फुल्लू की मां ने उसकी शादी बिगनी यानी ज्योती सेठी से करा दी है लेकिन शादी के बाद भी फुल्लू की हरकतों में कोई बदलाव नहीं आता है। वो हमेशा की तरह शहर आया जाया करता है लेकिन एक बार जब वो मेडिकल स्टोर पर जाकर के वहां की डॉक्टर से महिलाओं की माहवारी के पैड के बारे में समझता है तो उसे लगता है कि उसके घर में रहने वाली महिलाएं और उसके गांव की महिलाओं के लिए भी कम पैसों में पैड की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

इसलिए फुल्लू शहर जा कर के पैड बनाना सीखता है लेकिन जब वो सीख कर वापस गांव आता है तो उसके घरवाले ही उसे लताड़ लगाते हैं। हालांकि फुल्लू की बीवी को यकीन रहता है कि उसका पति एक ना एक दिन अपने मंसूबे में कामयाब होगा, कहानी में कई ट्विस्ट आते हैं और फिर ये कहानी अपने अंजाम तक कैसे पहुँचती है ये आपको कहानी देखने के बाद ही पता चलेगा।

इसलिए देख सकते हैं फ़िल्म

इस फ़िल्म की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये फिल्म महिलाओं से जुड़ी है और महीने के दौरान आने वाली प्रॉब्लम की तरफ ध्यान आकर्षित करती है। ऐसी फ़िल्में बहुत ही कम बनती हैं। ये फ़िल्म आपका मनोरंजन शायद उतना ना करे लेकिन ये आपकी आंखें खोलने का काम जरूर करती है। फिल्म में काफी अच्छा डायरेक्शन है साथ ही रियल लोकेशन फिल्म को और भी अच्छा बनाती हैं, गांव के लोकेशन और रोजमर्रा की जिंदगी के काम की वजह से ये फ़िल्म और भी ज़्यादा असली लगती है। इस फिल्म में कोई बड़ी स्टारकास्ट नहीं है। मगर एक्टर शारिब अली हाशमी और ज्योति सेठी ने काफ़ी अच्छी एक्टिंग की है। फिल्म का म्यूज़िक अच्छा है। ‘भुनर-भुनर’ गाना गांव में गाए जाने वाले गीतों की तरह है।