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सफलता के आसमान में उड़ान भरतीं अनुराधा सिंह

कहते हैं जब किस्मत के असमतल रास्ते पर किसी जुनूनी के कदम पड़ते हैं तो रास्ते ना सिर्फ समतल होते हैं बल्कि वो दूसरों के लिए एक नज़ीर भी बन जाते हैं। ऐसी ही एक अदाकारा हैं जिन्हें मायानगरी मुंबई में दस्तक दिए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है लेकिन 2 साल में संघर्ष और सफलता दोनों का स्वाद इन्होंने चखा है। इस अदाकारा का नाम है अनुराधा सिंह। हरियाणा के हिसार में पली बढ़ी अनुराधा इस वक्त एंड टीवी पर प्रसारित हो रहे सीरियल अग्निफेरा में ‘दुलारी’ का किरदार निभा रही हैं। शो से जुड़े लोगों की माने तो इस सीरियल में दुलारी का किरदार काफी चुनौतीपूर्ण है। अनुराधा सिंह इसके अलावा में जिंदगी चैनल पर प्रसारित होने वाले शो ‘ख्वाबों की जमीं पर’ में अदिति का किरदार निभा चुकीं हैं। जो काफी लोकप्रिय भी हुआ था। मुंबई में कदम रखने के कुछ समय तक संघर्ष करने के बाद अनुराधा सिंह को पहला ब्रेक सावधान ‘इंडिया’ में मिला और फिर सफलता की तरफ उन्होंने एक के बाद एक कदम बढ़ाने शुरू कर दिए,हालांकि इन शुरुआती सफलता को अनुराधा सिंह भी महज आगाज़ मानती हैं और कहती हैं ‘अभी जहां और भी है।’ पेश है उनसे बातचीत के अंश:

1. हिसार से मुंबई कब ख्याल आया की एक्टिंग करनी है और क्यों आया यह ख्याल?

जवाब: जो आपका सवाल है काश कि ऐसा हुआ तो और मैं हिसार से सीधे मुंबई आती तो तकरीबन 8 साल मुंबई को दे चुकी होती। दरअसल मैं पहले हिसार से दिल्ली आई थी। दिल्ली में तकरीबन 8 साल रही। मीडिया में काम किया। काफी दिनों तक काम करने के बाद अचानक ख्याल आया कि बस बहुत हुआ मीडिया और अब एक्टिंग करनी है और बस आ गई मुंबई। हालांकि यह आसान नहीं था। सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि आप किसी को जानते नहीं हैं,शुरुआत कैसे होगी नया काम हालांकि बस पहले ब्रेक की देर थी। यहां जब आई तो थोड़ा काम थिएटर में किया। दोस्त भी बने उन्होंने सपोर्ट भी किया।

2. कुछ अपने स्ट्रगल के दौर के बारे में बताइए ?

जवाब: ज्यादा स्ट्रगल नहीं करना पड़ा। दरअसल मैं एक स्मार्ट मूवर हूं, तो जब मैं मुंबई आ रही थी तो मैं यहां एक न्यूज चैनल में पार्ट टाइम नौकरी की। इसके साथ-साथ ऑडिशन दिया। नौकरी इसलिए की ताकि पैसे की कमी ना हो और वापस जाने का ख्याल ना आए लेकिन स्ट्रगल में जो मज़ा है उसका पता कामयाबी के बाद चलता है।

3. अपने नए शो अग्निफेरा के बारे में और अपने किरदार के बारे में कुछ बताइए?

जवाब: काफी अच्छा शो है, वुमन इंपावरमेंट की झलक आपको देखने को मिलगी इस शो में। जैसे आप लोग जानते हैं कि लड़कियों के दो पहलू होते हैं सॉफ्ट भी और अग्रेसिव भी। यह दोनों पहलू आपको शो की लीड में देखने को मिलेंगे। जहां तक मेरे किरदार ‘दुलारी’ का सवाल है तो नाम के मुताबिक मुझे सबका प्यार मिलता है। ‘दुलारी’ के मन में जो होता है वो बोल देती है वो यह नहीं देखती कि माहौल क्या है। मेरी नीजि जिंदगी से ‘दुलारी’ का किरदार काफी मिलता है बस मुझे यह पता होता है कि कब,कहां,क्या बोलना है। बाकि ‘दुलारी’ को और करीब से जानने के लिए देखिए ‘अग्निफेरा’ रात 8 बजे एंड टीवी पर।

4. आप मानती हैं कि गॉड फादर होना जरुरी है ? या गॉडफादर के होने से सफर आसान हो जाता है ?

जवाब: ऐसा कई बार लगता है कि शायद जरूरी है क्योंकि कई बार आप देखते हैं कि जिसका गॉड फादर है वो आपसे आगे निकल रहे हैं। तब लगता है कि इनके लिए चीजें कितनी आसान है,लेकिन एक बात मैं कहना चाहूंगी कि अगर आपने सोच लिया है कि आपको करना है,आपमे सीखने की चाहत है तो फिर आप लंबी रेस के घोड़े बन सकते हैं। जब आप बिना गॉड फादर के कामयाबी हासिल करते हैं तो उसके स्वाद में AC की ठंडी हवाओं की मिठास नहीं होती बल्कि पसीने का खट्टापन होता है और आपको याद होगा गुलशन ग्रोवर सर का वो डायलोग जिंदगी का मजा तो खट्टे में है।(हंसते हुए)

5. हरियाणा से कई कलाकार बॉलीवुड में और कई लोग काम कर रहे हैं आपको लगता है आने वाले दिनों में मायानगरी पर हरियाणा के लोगों का दबदबा होगा ?

जवाब: मुझे लगता है कि हरियाणा के लोगों में जुनून होता है। चाहे आप हरियाणा के पहलवानों को देखें,मुक्केबाजों को देखें,नेताओं को देखें या फिर अभिनेताओं को देखें तो आप पाएंगे कि हर क्षेत्र में उनका दबदबा है। हालांकि हरियाणा की फिल्म इंडस्ट्री की बात की जाए जो वो अभी बढ़ रहा है,सरकार और कई कलाकार कोशिश कर रहे हैं। वैसे मुंबई का दिल बहुत बड़ा है और अगर आपमे दम है तो You will rock.

6. हमें जानकारी मिली कि आप कपड़े भी डिजाइन करती थीं और फिर मीडिया में भी काम किया और अब एक्टिंग में और इन सबके लिए कहीं से कोई कोर्स भी नहीं किया तो इसकी प्रेरणा कहां से मिलती है?

जवाब: जब मैं 12वीं में थी तभी मैंने कपड़े डिजाइन करना शुरू कर दिया था। उम्र के साथ आपके सपने भी बदलते रहते हैं। उस समय मैं मम्मी की कई साड़ियों के साथ एक्सपेरिमेंट भी किया और ऐसा करने में कई साड़ियां खराब भी हो गईं। मैंने एक मैगजीन की कॉम्पिटिशन भी जीती अपने डिजाइन किए हुए कपड़ों के लिए। फिर मीडिया में काम किया। मीडिया में काम करना आसान नहीं होता। मैंने 12-13 घंटों की शिफ्ट की। साथ में काम करने वाले दोस्तों से सीखा। हां यह सच है कि मैंने कहीं से कोई प्रोफेशनल कोर्स नहीं किया लेकिन मेरा मानना है कि सबकुछ सोच पर निर्भर करती है।

7. एक आखिरी सवाल,परिवार से अगल रहना क्या बेचैन करता है कभी ?

जवाब: आपने रईस फिल्म का डॉयलॉग सुना होगा”जो धंधे के लिए सही वो सही, जो गलत वो गलत, इससे ज्यादा कभी सोचा नहीं” मैं इसी सिद्धांत पर चलती हूं। परिवार से दूर रहना मुश्किल होता है लेकिन काफी समय से दूर हूं तो मैनेज हो जाता है और सबसे बड़ी बात मेरी कामयाबी से वो काफी खुश हैं, क्योंकि सिर्फ मैं दूर नहीं वो भी दूर हैं।
सच ही कहा गया है कि ‘मंजिल की तलाश में क्यों फिर रहा है राही,इतना अज़ीम बन की मंजिल तुझे पुकारे’ और शायद अनुराधा सिंह को मंजिल ने ही पुकारा था जिसकी वजह से वो मुंबई में हैं और कामयाबी तरफ आगे बढ़ रही हैं। हमारी दुआएं अनुराधा सिंह के साथ हैं।