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Ohhhh…. तो इसलिए शुक्रवार को ही होती हैं फ़िल्में रिलीज़ !

बॉलीवुड और फ्राइडे का बहुत गहरा कनेक्शन है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों तो हम आपको बता दें कि बॉलीवुड जिन फिल्मों की वजह से जाना जाता है वो फ़िल्में ही फ्राइडे को रिलीज़ होती हैं। मगर क्या आपने इस पर कभी गौर किया कि शुक्रवार को ही फिल्में क्यों रिलीज होती हैं? चलिये आज हम आपको बताएंगे कि आखिर फ़िल्में फ्राइडे को ही क्यों रिलीज़ होती हैं।

दरअसल 3 मई 1913 को रिलीज हुई पहली हिंदी फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ से लेकर फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ तक फ़िल्में फ्राइडे को रिलीज़ नहीं होती थी बल्कि किसी भी दिन फ़िल्में रिलीज़ कर दी जाती थीं। उस वक़्त ज़्यादातर फ़िल्में सोमवार को रिलीज होती थी। मगर ‘मुगल-ए-आजम’ वो पहली फिल्म थी जो शुक्रवार को रिलीज हुई। ये फिल्म 5 अगस्त 1960 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने रिलीज होने के साथ ही जबरदस्त कलेक्शन किया। ये फ़िल्म ना सिर्फ सुपरहिट हुई बल्कि इसने बाकी सभी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया।

दरअसल,फ्राइडे को ज़्यादातर लोगों का वीकेंड होता है। फ्राइडे के बाद दो दिन छुट्टी के लिहाज से अच्छे होते हैं जिसकी वजह से ज्यादा से ज्यादा लोग फिल्म देख पाते हैं। जबकि सोमवार को फिल्म रिलीज़ होने पर वो कलेक्शन नहीं हो पाता जो फ्राइडे को आता है। यही वजह थी कि बाकी निर्देशकों का ध्यान भी इस तरफ गया कि मुगलएआजम को इसलिए बड़ी ओपनिंग मिली क्योंकि वो फ्राइडे को रिलीज़ हुई। इसी वजह से दूसरे निर्माता-निर्देशकों ने भी इसके बाद फ्राइडे को अपनी फ़िल्म रिलीज़ करना शुरू कर दिया। वहीं दूसरा कारण ये भी माना जाता है कि मुगलएआजम की सफलता के बाद लोग फ्राइडे को लकी मानने लगे। इसलिए हर कोई अपनी फ़िल्म फ्राइडे को ही रिलीज़ करने लगा। ‘मुगल-ए-आजम’ के बाद बॉलीवुड में यह प्रचलन चल पड़ा जिसके बाद अब फिल्में शुक्रवार को ही रिलीज होती हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि बॉलीवुड में ये चलन हॉलीवुड से आया है। दरअसल, हॉलीवुड की पॉपुलर फिल्म ‘गोन विद द विंड’ को 15 दिसंबर 1939 में रिलीज किया गया। इस दिन शुक्रवार था।