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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में किया राष्ट्र को संबोधित, जानिए क्या कहा मोदी ने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 33वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम से देश को संबोधित किया। पीएम मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के अंतर्गत विचार साझा करते हैं।
मोदी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा,

-आज जगन्नाथ जी की रथयात्रा का उत्सव मनाया जा रहा है। इसके साथ देश का गरीब जुड़ा हुआ है।

-रमजान का पवित्र महीना इबादत के साथ मनाया गया। मेरी तरफ से सबको ईद की बहुत शुभकामनाएं।

– मुबारकपुर गांव को शौच बनवाने के लिए सरकार की ओर 17 लाख रूपये दिए, लेकिन उन्हीने पैसे वापस करते हुए कहा कि, ये पैसे सरकार गांव में दूसरे कामों के विकास लिए खर्च करे। साथ ही उन्होंने कहा गांव के लोगों की तारीफ़ करते हुए कहा कि, उन्हीं लोगों के प्रयास की बदौलत आज गांव शौंच मुक्त हो गया है।

-आज स्वच्छता एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि जन आंदोलन बन गया है।

-आंध्र प्रदेश के विजयनगर में प्रशासन और जनता ने 100 घंटों में 71 ग्राम पंचायतों में दस हज़ार शौचालय बनाये।

-आपातकाल में अटल जी भी जेल में थे, उन्होंने कविता लिखी, ‘झुलसता जेठ मास, शरद चांदनी उदास, सिसकी भरते सावन का अंतर्घट रीत गया, एक बरस बीत गया।

-योग एक धागे में बंध गया है , विश्व को जोड़ने का कारण बन गया है। चीन में और दुनियाभर में योग का अभ्यास हुआ।

-पेरू अफगानिस्तान, सिंगापुर, यूएन में योग दिवस मनाया गया। यूएन में 10 स्टैंप जारी किये।

-पहली बार लखनऊ में बारिश में योग करने का अवसर प्राप्त हुआ।

-केरल ने मुझे कार्यक्रम में बताया गया कि वहां बुके नहीं बुक दी जाती है।

-हम धीरे धीरे बुके की जगह बुक या खादी रुमाल देने की आदत डाल रहे हैं और सरकार में भी लागू कर रहे हैं।

-क्वीन एलिज़ाबेथ ने एक बार भोजन के बाद मुझे खादी का रुमाल दिखाकर कहा कि उनकी शादी के उन्हें महात्मा गाँधी ने भेंट किया था।

-कोई अगर सरकार को कुछ बेचना चाहता है तो ई-जेम पर रजिस्टर कर सकता है।

-योग के अलावा हम अंतरिक्ष विज्ञानं पर भी गर्व करते हैं। दो दिन पहले ISRO ने 31 सैटेलाइट्स लांच किये।

-मंगल अभियान को 6 महीने चलना था लेकिन हमारी ताकत ये है कि 1000 दिनों के बाद भी मंगलयान काम कर रह रहा।

-युवाओं का रुझान खेल की तरफ बढ़ रहा है। किदांबी श्रीकांत ने हमारा मान बढ़ाया है।

-हमें बच्चों को खेल का अवसर देना चाहिए। अगले ओलिंपिक के लिए सभी को सपने सजोने चाहिए।