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Ohhhh… तो इसलिए लगाए जाते हैं तिलक के ऊपर चावल के दाने..

हमारे हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। आपने अक्सर ही देखा होगा कि घर के बड़े बुजुर्ग, महिलाएं या पंडित पूजा के बाद माथे पर तिलक लगाकर उसके ऊपर अक्षत यानी की चावल भी लगाते हैं। लेकिन क्या कभी आपने कभी ये सोचा है कि ऐसा क्यों होता हैं और माथे पर ही तिलक के साथ अक्षत क्यों लगाया जाता है। अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे..

दरअसल हिन्दू धर्म में पूजन के समय माथे पर अधिकतर कुमकुम का तिलक लगाने की और उस पर चावल लगाने की मान्यता सालों से चली आ रही है। सबसे पहले तो हम आपको ये बता दें कि तिलक लगाने से दिमाग में शांति और शीतलता बनी रहती है। वहीं तिलक स्किन की बीमारियों से बचाता है।

शास्त्रों के अनुसार चावल को हविष्य यानी हवन में देवताओं को चढ़ाया जाने वाला और शुद्ध अन्न माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि कच्चा चावल सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला है। तिलक के ऊपर चावल इसलिए लगाए जाते हैं क्योंकि चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

इसी वजह से पूजन में कुमकुम के तिलक के ऊपर चावल के दाने लगाए जाते हैं। साथ ही चावल को पीछे की तरफ इसलिए फेंका जाता है ताकि हमारे आसपास जो भी नकारात्मक ऊर्जा उपस्थित हो वह सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाए और हम सकारात्मक विचारों के साथ जीवन जीएं। तो अब आपको समझ आ ही गया होगा कि हमारे धर्म तिलक और अक्षत का क्या महत्व है।