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8 साल पहले इस रिक्शे वाले ने बचाई थी एक लड़की की जान और उस लड़की ने..

अक्सर ही हमारी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे सरप्राइज हमें मिलते हैं जिसपर हमें यकीन करना मुश्किल हो जाता है. आप जो भी करें अच्छा या बुरा आपको अपने किये का फल आज या कल मिलेगा ही. आपको इस कहे पर यकीन हो या न हो लेकिन इस रिक्शे वाले की कहानी कुछ यही बयां करती है. अपनी इसी कहानी को बाबू शेख दिवुल्जे ने बताते हुए कहा कि कैसे कुछ सालों पहले घटी एक घटना ने आज उसकी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।

शेख ने कुछ साल पहले एक लड़की की ज़िंदगी बचाई थी जो रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या करने जा रही थी वही लड़की आठ सालों बाद उसकी ज़िंदगी में वापस आयी और शेख को उसकी जान बचाने के लिए शुक्रिया किया एक अलग ही अंदाज़ में.

एक फेसबुक पेज GMB Akash, ने शेख की कहानी को पोस्ट किया जिसे पढ़कर आपकी आंखें नम हो जाएँगी। ये कहानी फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रही है और इस कहानी ने कैसे एक रिक्शा चलाने वाली की ज़िंदगी बदल दी. इस पोस्ट को करीब 27,000 से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है और करीब 5,000 से अधिक लोगों ने शेयर किया है.

बता दें कि, इस कहानी में शेख ने बताया है कि, ‘कुछ साल पहले एक पिता ने अपनी बेटी को मेरे रिक्शे पर बिठाया और उसे कॉलेज छोड़ने को कहा लेकिन वो लड़की किसी वजह से आत्महत्या करना चाहती थी और रेलवे स्टेशन पहुंचकर भागते हुए स्टेशन के अंदर गयी और अपना पर्स मेरे रिक्शे पर ही छोड़ गयी. मुझे उसके पिता की कही बातें याद आयी तो मैं भी कुछ देर बाद उसके पीछे गया. वो खुद को नुकसान पहुँचाना चाहती थी. मुझे देखकर मुझपर खूब चिल्लाई कि चले जाओ मुझे अकेला छोड़ दो लेकिन मैं वही कुछ दुरी पर घंटों बैठा रहा बारिश भी होने लगी फिर काफी समय बीतने के बाद वो लड़की मेरे पास आयी और रिक्शे से चलने को कहा मैं उसे उसके घर छोड़ आया और फिर कभी नहीं मिला। 8 सालों बाद मैं उससे मिला। दरअसल, मेरा एक्सीडेंट हो गया था आसपास के लोगों ने मुझे अस्पताल पहुँचाया था. जब मुझे होश आया एक लड़की मेरे पास आयी और पूछा अब आप कैसे हो? आप मुझसे फिर मिलने क्यों नहीं आये? मैं उसके कपड़ो से उसे पहचान नहीं पा रहा था. मेरा अच्छे से इलाज़ हुआ. मुझे बड़े डॉक्टर के पास ले जाया गया जहां वो कह रही थी, ‘मेरे पापा को बचा लीजिये अगर ये नहीं होते तो आज मैं डॉक्टर नहीं होती।’ उस लड़की के ये बोल मेरे दिल को छू गए मैं अपनी ख़ुशी बयां नहीं कर सकता। मैं हमेशा यही सोचता था कि मेरी कोई बेटी क्यों नहीं है और आज में गर्व से कह सकता हूँ कि मेरी भी एक बेटी है जो डॉक्टर है.’