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ये है भारत का चरसी गाँव, विदेशी भी खरीदते हैं यहाँ से चरस…

दुनिया भर में सिगरेट और शराब के बाद अब गांजे का चलन बहुत तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। हालांकि गांजे को एक बुरी लत माना जाता है लेकिन बाबज़ूद इसके आजकल ज़्यादातर लोग गांजे का शौक करते हैं। गांजा बेचना ग़ैरकानूनी है लेकिन फिर भी गांजा भारत के लगभग हर शहर में चोरी छिपे बेचा जाता है। मगर भारत में एक गाँव तो ऐसा भी है जहां गांजे की खेती होती है।

इस गाँव का नाम है मलाना। इस गाँव में जाना आसान नहीं है क्यूंकि सड़क जहां खत्म होती हैं वहां से मलाना का रास्ता शुरू होता है और ये रास्ता 4 दिन का हैं।
हिमालय की गोद में बसे इस छोटे से गाँव में कई सालों से गांजे की खेती होती है। ये गाँव देश ही नहीं दुनिया में भी मशहूर गांजे वाले गांव के नाम से फेमस है। मलाना नाम की ये छोटी सी जगह दुनियाभर के चरसियों की पसंदीदा जगह है।
आइये आपको मिलवाते हैं गांजे वाले गाँव से…

इस गाँव के लोग जामलू देवता को मानते हैं सब नियम इसी देवता के दिए हुए हैं।

यहां के लोग अपनी पंचायत चुनते हैं और सब मसले ख़ुद ही हल करते हैं।

गांव सर्दियों के छह महीने बंद रहता हैं सब काम गर्मियों में ही निपटाए जाते हैं।

इस गांव में बड़ी तादात में विदेशी आते हैं।

यहाँ 20 ग्राम हशीश तैयार करके एक आदमी 50 से 150 डॉलर तक कम लेता हैं।

यहां की हशीश ऐम्सटर्डैम की दुकानों में भी मिलती हैं।

2016 में ही यहाँ 593 एकड़ पर अफीम की खेती हुई और 12 हजार किलो हशीश की पैदावार हुई।