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इन गांवों में नहीं है कोई मर्द, लेकिन फिर भी इस गांव की औरतें हो रही हैं गर्भवती 

एक गांव जहां न कोई मर्द है न मर्द जाति का कोई नामों निशान, लेकिन क़ुदरत मेहरबानी ऐसी कि गावों की लगभग सभी औरतें गर्वभती हैं। जी हाँ केन्या के इस गाँव में सिर्फ़ 47 औरतें रहती हैं और आपको जान कर हैरानी होगी कि 47 महिलाओं के 300 बच्चे हैं।  इस गांव में एक भी मर्द नहीं रहता है। इस गांव का नाम ‘साम्बुरु’ है और इस गांव की खोज उन आखरी 15 महिलाओं ने की थी जो ब्रिटिश राज में किये हुए शोषण, बलात्कार और अत्याचार के बाद भी वहाँ से ज़िंदा निकल कर अपना ठीहा इस गांव में बना लिया। ये गाँव किसी आम गाँव की तरह ही है बस इस गाँव में मर्दो के रहने पर प्रतिबंध है। इस गाँव में शुरुआत से ही उन महिलाओं ने मर्दो के इस गाँव में रहने पर ही पाबन्दी लगा दी है।
ख़ैर सवाल ये पैदा होता है की अगर इस गाँव में मर्दो के आने पर पाबंदी है तो इस गाँव में बच्चो की किलकारियां कैसे गूँज रही हैं ? आपको बता दें इस गाँव की खोज 1990 में हुइ थी। फिलहाल इस पुरे गाँव में सिर्फ एक ही आदमी रहता है जिसका नाम है “लोटूकै”और जो हर दिन गाँव में सूरज डूबने से पहले गांव में एक बार आता है क्यों  कि औरतों का काम होता है खाना बनाना, रोज़ी रोटी देखना और वही दूसरी तरफ लोटूकै का काम है जानवरों की देखभाल करना। आपको
जानकर हैरानी होगी की जानवरों को देखने के साथ-साथ वो अलग अलग महिलाओं के साथ सम्बन्ध भी बनता है। जो कि इस गांव की महिलाओं को पता है, दरअसल संतान के लिए महिलाएं बाहर के गावों के लोगो से सम्बन्ध बनती है और इसीलिए पड़ोस के गावों के मर्दों की तीन से चार बीवियां होती है।इस गाँव में जितनी भी महिलाएं हैं वो या तो बलात्कार का शिकार हुई हैं या फिर ब्रिटिश आर्मी  अत्याचार से बच के भागी हुईं हैं।  कई महिलाएं ऐसी भी हैं जिनके पांच बच्चे हैं और पांचो अलग-अलग  बाप से।